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आतंकवादी इंसान रूपी दानव

Posted On: 15 Nov, 2015 Others में

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आतंकवाद जिसका नाम सुनकर ही दिल दहल उठता है. दहशत का ये ऐसा नाम है, जो किसी के जहन में डर पैदा कर सकता. भारत ही नही पूरा विश्व इससे दुखी है. 14 नवम्बर शनिवार को एक बार फिर इन दहशतगर्दो ने अपना दानवी रूप दिखा दिया है. इस बार इनके निशाने पर फ्रांस का पेरिस था. मुम्बई में 26/11  जैसी वारदात को पेरिस में दोहरा दिया. जो कि किसी देश और इंसानियत के लिए काफी दुर्भाग्यपूर्ण है.

इस आंतकी हमले में लगभग 150 निर्दोष लोगों ने अपनी जान गवां दी. और 200 अधिक लोग घायल हुए हैं. पेरिस में 6 जगह लगातार हुए हमले ने पूरे विश्व को सहमा कर रख दिया है. इस हमले की जिम्मेदारी खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएस ने ली. हमले में 8 आतंकी मारे गए. एक जिंदा भी पकड़ा गया. जिसने कबूल कर लिया की वो सीरिया से है. इस हमले की जितनी निंदा की जाए कम है.

आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के लिए भारत अक्सर पूरे विश्व को एक जुट होकर लड़ने की बात करता रहता है. क्योंकि ये ऐसा विषैला सांप हो जिसका फन कुचलना जरूरी होता जा रहा है. अधिकतर देश आतंकवाद को लेकर परेशान हैं. इन दरिंदों को समाज और संसार से कोई मतलब नही है. इनका काम जिहाद के लिए मार दो या मर जाओं.  इसके साथ जुड़े लोगों को अपने घर परिवार से कोई मतलब नही.
धर्म, जिहाद के लिए कुछ भी कर सकते हैं. इनके साथ जुड़े लोगों को रोबोट की तरह तैयार किया जाता है. जिसे जितना कमांड दो वो करने के लिए तैयार रहता है. दूर बैठकर इनके आका भी कमांड देते हैं. ये अच्छा बुरा न सोचकर करने के लिए तैयार रहते है. अपना तो मरते ही है, कितने बेगुनाहों के ले डूबते हैं?

जिन बेचारों ने इनका कुछ बिगाड़ा नही होता है. भगवान ने इंसान को दिमाग दिया है. वो अपना अच्छा बुरा सोच सकें. लेकिन इन दरिंदों का दिमाग जैसे निकाल दिया जाता है. और मशीन के रूप में परिवर्तित कर दिया जाता है. जिनके कहने पर ये दानव अपने ऊपर गोली खाकर मरते हैं. वो तो दूर बैठकर तमाशा देखते हैं. अपनी जिंदगी को अय्याशी से जीते है. उनके नजर में संगठन से जुड़े लोग सिर्फ मिशन के लिए होते है. वो मरे तो मरे क्या मतलब. उनका लक्ष्य पूरा होना चाहिए.

दहशत फैलनी चाहिए जहां वो चाहे. मर गए तो दूसरे तैयार होगें. जिसकों इनकी कहानी सुनाकर माइंडवाश करते हैं. फिर से इनकी फौज तैयार. किसने क्या खोया इसका कोई हिसाब नही?  पहले के युग में राक्षस थे जो बेगुनाहों को मारते थे. जिनका वध करने के लिए भगवान को अवतार लेना पड़ता था. इस युग में ये आतंकी है. अब इनका खात्मा करने के लिए सभी देशों को साथ होना पड़ेगा.

कहते है एकता में शक्ति होती है. तो उस शक्ति को क्यों नही दिखाते जब कि ये पता है कि सभी देशों को लिए आतंकवाद एक अहम मुद्दा है. दिन प्रतिदिन फैल रहे इसके पैर को काटा नही गया तो, इनकी इस जिहादी की आग में कोई न कोई देश जलता रहेगा.

रवि श्रीवास्तव

पत्रकार

ravi21dec1987@gmail.com

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